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एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबीनार का सफलतापूर्वक समापन

-अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार का उद्देश्य कोरोना महामारी के उपरांत शैक्षिक परिदृश्य की संभावना और चुनौतियों पर अंतर्दृष्टि विकसित करना था

ढालवाला।पंडित मदन मोहन मालवीय,राष्ट्रीय शिक्षक एवं प्रशिक्षण मिशन के तत्वाधान में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबीनार का सफलतापूर्वक समापन हुआ। करोना -19 महामारी ने पूरी दुनिया के शिक्षा प्रणाली को बुरी तरह प्रभावित किया है।

इस परिदृश्य में मदन मोहन मालवीय, राष्ट्रीय शिक्षक एवं प्रशिक्षण मिशन की MHRD योजना के तहत स्कूल ऑफ एजुकेशन हेमवती नंदन,बहुगुणा,गढ़वाल विश्वविद्यालय,केंद्रीय विश्वविद्यालय,श्रीनगर उत्तराखंड एवं मॉडर्न इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) ढालवाला ऋषिकेश के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन शनिवार 6 जून को किया गया था।

जिसका शीर्षक कोरोना -19 महामारी के उपरांत शैक्षिक परिदृश्य: दृष्टि एवं समाधान रखा गया था। इस अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार का उद्देश्य कोरोना महामारी के उपरांत शैक्षिक परिदृश्य की संभावना और चुनौतियों पर अंतर्दृष्टि विकसित करना था। अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में भारत के लगभग सभी राज्यों से उच्च शिक्षा में कार्य कर रहे शिक्षकों,अनुसंधान अध्येताओं एवं शिक्षाविदों सहित लगभग 2300 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन जुड़कर वक्ताओं के विचारों को सुना।

 


प्रतिभागियों में संयुक्त राज्य अमेरिका मलेशिया ब्रिटेन एवं जर्मनी सहित दुनिया भर से प्रतिभागियों ने भी इस अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में सहभागिता की।

वेबीनार में भारत की ओर से प्रमुख वक्ता के रूप में प्रो ओ पी पांडे जो कि पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार,भारत सरकार (पीएमओ) एवं प्रोफेसर अरविंद कुमार झा जो डीन ऑफ एजुकेशन,बाबा भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) लखनऊ थे।जबकि अंतरराष्ट्रीय वक्ता के रूप में डॉ दीपक खजांची प्रोफेसर, इंफॉर्मेशन सिस्टम और कवानटेटिव एनालिसिस,एसोसिएट डीन आफ एकेडमिक अफेयसर नेब्रास्का (ओमाहा) विश्वविद्यालय,संयुक्त राज्य अमेरिका और प्रो अतुल कुमार सक्सेना,प्रोफेसर ऑफ फाइनेंस,जॉर्जिया ग्विनेट कॉलेज,यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया,संयुक्त राज्य अमेरिका से थे।

अंतर्राष्ट्रीय वेविनार की आयोजन सचिव प्रो ज्योति जुयाल द्वारा सम्मानित वक्ताओं,अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए वेबीनार की शुरुआत की। प्रो पी के जोशी कोऑर्डिनेटर पी एम एम एम एन एम टी टी स्कूल ऑफ एजुकेशन,हेमवती नंदन, बहुगुणा,गढ़वाल विश्वविद्यालय,केंद्रीय विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय वेबीनार का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों ही स्तरों पर शिक्षा समुदाय कोरोना-19 महामारी के सबसे बड़े पीड़ित के रूप में है।


प्रो जोशी ने अपने उद्बोधन में बताया कि यद्यपि हाल के दिनों में ऑनलाइन शिक्षा एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभरी है लेकिन यह भी तथ्य लगातार बना हुआ है कि युवाओं का एक विशाल समूह महामारी के कारण शिक्षण सीखने और मूल्यांकन की मुख्यधारा से वंचित हो रहा है। प्रो जोशी ने अतिथि वक्ताओं को आमंत्रित करते हुए शिक्षा के द्वारा समाज के सतत विकास पर जोर देते हुए प्रो ओ पी पांडे को आमंत्रित किया।अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार में प्रथम वक्ता प्रो ओ पी पांडे ने कोरोना -19 के संक्रमण लक्षण और उपचार के बारे में बताते हुए व्यायाम और ध्यान द्वारा अधिक औषधीय वनस्पतियों और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने हेतु प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने पर जोर दिया।

उन्होंने प्राचीन और वर्तमान शिक्षा प्रणाली की तुलना करते हुए बुद्धि के उपयोग द्वारा मानवीय जीवन को बदलने वाले निर्णय लेने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों और शिक्षकों को विभिन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए व्यवहारिक ज्ञान बहुत आवश्यक है। प्रो पी के जोशी ने प्रो पांडे को उनकी अद्भुत विश्लेषण और अभिव्यक्ति के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रो ज्योति जुयाल लें द्वितीय वक्ता के रूप में प्रो अरविंद कुमार झा की संक्षिप्त शैक्षणिक उपलब्धियों का परिचय देते हुए उन्हें आमंत्रित किया। प्रो अरविंद कुमार झा ने शैक्षिक परिदृश्य विषय पर अपनी बात रखते हुए बताया कि शिक्षा को बड़े परिपेक्ष में दिशा देनी चाहिए।

उन्होंने विश्व बैंक के आंकड़ों को रखते हुए जानकारी दी कि कोरोना- 19 के दौरान 23 मार्च तक लगभग 1.38 बिलियन छात्रों की एक बहुत बड़ी संख्या शिक्षा से वंचित हो गई थी और इस स्थिति को दुनिया भर के छात्रों में थोड़ा सुधार किया गया जो शिक्षा से बाहर हो गए थे,उन्होंने अपने संबोधन में इस तथ्य पर जोर दिया कि ऑनलाइन शिक्षण अपर्याप्त है और फेस टू फेस शिक्षण का कोई मुकाबला नहीं है।

उन्होंने शैक्षणिक, सामाजिक-सांस्कृतिक,आर्थिक परिणामों से संबंधित समस्याओं को स्पष्ट किया। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षा के परिदृश्य का आर्थिक और वित्तीय स्थिति के प्रकाश में बड़ा योगदान होता है। उन्होंने कोरोना -19 के दौरान फेस टू फेस से M2OC के आधार पर अपने शिक्षण मॉडल को भी प्रस्तुत किया। प्रो जोशी ने अरविंद कुमार झा की प्रस्तुति की भूरि-भूरि प्रशंसा की। प्रो ज्योति जुयाल ने प्रो अतुल सक्सेना की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए आमंत्रित किया। वेबीनार में अंतरराष्ट्रीय वक्ता डॉ अतुल सक्सेना ने कोरोना स्कोरिंग पर बात की, डॉ सक्सेना ने विस्तार से बताया कि कोरोना -19 ने संयुक्त राज्य अमेरिका के लोगों के स्वास्थ्य पर किस प्रकार बहुत ही बुरा प्रभाव डाला है और इसने किस प्रकार लाखों लोगों की नौकरी ले ली है।

जिससे संयुक्त राज्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। उन्होंने शिक्षा कार्यप्रणाली कोरोना 19 के कारण मजबूर तालाबंदी ने किस प्रकार प्राथमिक, मध्य एवं उच्च विद्यालयों सहित उच्च शिक्षा के हर क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। प्रो सक्सेना ने कोरोना 19 के द्वारा छात्रों,अभिभावकों,शिक्षकों और शैक्षिक संस्थानों के प्रशासकों की विभिन्न चुनौतियों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा को न केवल अमेरिका वरन विश्व के अनेक राष्ट्रों ने अपनी शिक्षा व्यवस्था का अंग बनाया है।

डाॅ सक्सेना ने पाठ्यक्रम में पर्यावरण और स्वास्थ्य पाठ्यक्रम को एकीकृत करने, स्वच्छता प्रथाओं और पर्यावरण नीतियों को मजबूत करने, ऑनलाइन शिक्षा के लिए मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं को शामिल करने, पाठ्यक्रम दक्षताओं को संरक्षित करने के साथ शिक्षकों के शिक्षण पैमाने को ऑनलाइन सीखने और अनुसंधान प्रयासों को मजबूत करने की सिफारिश की। प्रो पी के जोशी ने डॉ सक्सेना को उनकी साक्ष्य आधारित जानकारी के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रो ज्योति जुयाल ने अमेरिका के प्रो खजांची की उपलब्धियों को बताते हुए उन्हें अपने व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया।

उन्होंने प्रभावी ई लर्निंग के द्वारा रणनीति के रूप में सैद्धांतिक आधार और सर्वोत्तम प्रयासों के विषय पर चर्चा की। उन्होंने ई लर्निंग के विभिन्न तरीकों की व्याख्या करते हुए बताया कि ऑनलाइन शिक्षण के दौरान छात्रों और शिक्षकों को विभिन्न चुनौतियों का किसा प्रकार सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ई लर्निंग फेस टू फेस शिक्षण का विकल्प कभी नहीं हो सकता। लेकिन फेस टू फेस शिक्षण के अलावा कोई संभावना बची भी नहीं है।शिक्षण को बेहतर बनाने के लिए सर्वोत्तम प्रयासों का विकास किया जा सकता है।

उन्होंने विभिन्न सर्वोत्तम प्रयासों का सुझाव दिया। जिससे शिक्षण के तरीकों में सुधार कर सकते हैं और छात्रों को प्रभावी ढंग से सीखने में मदद कर सकते हैं। प्रो खजांची ने स्पष्ट और संप्रेषित पाठ्यक्रम की आवश्यकता पर जोर दिया और मजबूत लर्निंग प्लेटफॉर्म का उपयोग,शिक्षार्थियों और शिक्षकों के बीच संचार की आवश्यकता,ऑनलाइन कक्षाओं को छोटे आकार में बांटते हुए बताया कि कोरोना महामारी के उपरांत प्रभावी ई लर्निंग के लिए शिक्षा के हाइब्रिड मॉडल की आवश्यकता होगी।

जिसमें फेस टू फेस घटकों के साथ समर्थित ई लर्निंग शामिल है। कार्यक्रम के अंत में प्रो पी के जोशी प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर स्कूल ऑफ एजुकेशन हेमवती नंदन,बहुगुणा,गढ़वाल विश्वविद्यालय,केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में अंतरराष्ट्रीय वेबिनार के सफलतापूर्वक समापन होने के लिए संरक्षक कुलपति,प्रो अन्नपूर्णा नौटियाल एवं मॉडर्न इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के चेयरमैन एच जी जुयाल को धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम आयोजन सचिव प्रोफेसर ज्योति जुयाल डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन तथा आयोजन समिति के सदस्य सिद्धार्थ लोहानी एवं रश्मि चौहान शिक्षा विभाग,एचएनबीजीयू और अंशु यादव शिक्षा विभाग एमआईटी ऋषिकेश की सक्रिय भागीदारी के लिए प्रशंसा की। अंत में प्रो जोशी ने अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में शामिल हुए हजारों प्रतिभागियों की बहुत ही उत्साह और भावना के साथ सराहना करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।

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